एस. जयशंकर ने ट्रंप के भारत-पाक मध्यस्थता दावे को खारिज किया | भारत की विदेश नीति पर बड़ा बयान








एस. जयशंकर ने ट्रंप के भारत-पाकिस्तान मध्यस्थता दावे को सिरे से खारिज किया

भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सख्ती से नकार दिया है, जिसमें ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित परमाणु युद्ध को रोकने में मध्यस्थता की थी। डॉ. जयशंकर का बयान न केवल सटीक था, बल्कि उन्होंने ट्रंप के सभी दावों को तथ्यों के आधार पर पूरी तरह अस्वीकार कर दिया।

डॉ. जयशंकर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका ने भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी प्रकार की मध्यस्थता नहीं की। उन्होंने कहा, "अमेरिका उस समय अमेरिका में ही था, जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव था।" इसके विपरीत, पाकिस्तान ने खुद भारत से सीज़फायर की मांग की थी क्योंकि वह दबाव में था। इसके बाद भारत ने मानवीय दृष्टिकोण से सीज़फायर किया, लेकिन यह कभी नहीं कहा गया कि भारत ने ‘ऑपरेशन सिंधूर’ को रोक दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन समाप्त नहीं हुआ था।


ट्रंप का दावा और मीडिया का भ्रम

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल के दौरान बार-बार दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध को टाल दिया। अमेरिकी मीडिया के कुछ हिस्सों ने भी यह कहा कि ट्रंप ने भारत को व्यापारिक धमकी देकर युद्ध रुकवाया था। लेकिन जयशंकर के बयान ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत की रणनीति और निर्णय पूरी तरह स्वतंत्र और संप्रभु थे।

भारत सरकार ने पहले भी यह कहा है कि कश्मीर पर किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं होगी, और इसी नीति के तहत ट्रंप की किसी भी मध्यस्थता की बात को भारत ने सिरे से खारिज कर दिया।


अमेरिकी दस्तावेज़ और ट्रंप की प्रतिक्रिया

कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत द्वारा एयरबेस पर हमला किए जाने के बाद अमेरिकी सांसद जेडी वेन्स ने प्रधानमंत्री मोदी से एक आपातकालीन कॉल पर बात की थी, जो अमेरिका के रिकॉर्ड में दर्ज है। इस कॉल को लेकर काफी चर्चाएं भी हुई थीं। हालांकि, यह संवाद एक आपसी सहयोग के रूप में हुआ था, न कि किसी मध्यस्थता प्रयास के रूप में।

ट्रंप ने यह भी दावा किया था कि किसी "थर्ड पार्टी" देश में भारत और पाकिस्तान की वार्ता करवाई जाएगी, लेकिन भारत ने इस संभावना को भी पूरी तरह नकार दिया है।


जॉन बोल्टन का खुलासा

ट्रंप की इन बातों पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) जॉन बोल्टन ने भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ट्रंप बिना किसी ठोस भूमिका के केवल श्रेय लेना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप की विदेश नीति अक्सर अनियंत्रित और तथ्यहीन होती थी।


भारत का स्पष्ट रुख

भारत हमेशा से यह मानता रहा है कि भारत-पाकिस्तान के बीच के सभी मुद्दे द्विपक्षीय हैं और उनमें किसी तीसरे पक्ष की कोई जगह नहीं है। ट्रंप के बयान और प्रयास भारत की इस नीति के खिलाफ थे और डॉ. जयशंकर ने उसी नीति को मजबूती से दोहराया है।


निष्कर्ष

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने तर्क और तथ्यों के साथ यह स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका या डोनाल्ड ट्रंप की भारत-पाक युद्ध टालने में कोई भूमिका नहीं थी। भारतीय मीडिया और अब अमेरिकी विश्लेषक भी यह मानने लगे हैं कि ट्रंप अपने कार्यकाल की उपलब्धियों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं, जिनका असलियत से कोई लेना-देना नहीं है। भारत ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर अपनी संप्रभुता और कूटनीतिक दृढ़ता का परिचय दिया है।

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