इज़राइल-ईरान विवाद पर भारत का रुख: शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के बयान से बनाई दूरी


 

इज़राइल-ईरान विवाद पर भारत का रुख: शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के बयान से बनाई दूरी

नई दिल्ली, 14 जून 2025:
भारत ने शनिवार को स्पष्ट रूप से कहा कि उसने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) द्वारा जारी उस बयान का हिस्सा नहीं लिया जिसमें हाल ही में इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों की निंदा की गई थी। विदेश मंत्रालय (MEA) ने यह भी दोहराया कि भारत का रुख इस मसले पर स्वतंत्र और संतुलित है और उसने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के ज़रिए समाधान निकालने की अपील की है।

SCO के बयान से भारत ने क्यों बनाई दूरी?

SCO के बयान में इज़राइल के हमलों को "आक्रामक कार्रवाई" बताया गया, जिसमें नागरिक ठिकानों, ऊर्जा और परिवहन जैसे बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया था। बयान में इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन बताया गया और ईरानी नागरिकों की मौत पर शोक भी व्यक्त किया गया। SCO ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े विवाद को शांति और कूटनीति के ज़रिए हल करने की वकालत की।

हालांकि भारत ने इस बयान से खुद को अलग करते हुए कहा, "भारत ने इस मुद्दे पर हुई चर्चा में भाग नहीं लिया था, और न ही हम उस बयान के साथ जुड़े हैं।"

भारत का संतुलित और स्वतंत्र रुख

भारत ने पहले 13 जून को ही अपने रुख को स्पष्ट कर दिया था कि वह इस संघर्ष में किसी पक्ष के साथ नहीं है, बल्कि वह क्षेत्र में शांति और स्थिरता का पक्षधर है। MEA के अनुसार, “हम दोनों पक्षों से अपील करते हैं कि वे किसी भी प्रकार की और अधिक उकसाने वाली कार्रवाई से बचें। मौजूदा राजनयिक चैनलों के ज़रिए समाधान की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए।”

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी हाल ही में ईरानी विदेश मंत्री से बात की और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता को साझा करते हुए यह ज़रूर बताया कि इस तरह के तनावपूर्ण हालात वैश्विक शांति के लिए घातक हो सकते हैं।

भारत की कूटनीतिक सूझबूझ: सभी पक्षों से दोस्ती

भारत की स्थिति इस बात से भी स्पष्ट होती है कि वह इज़राइल और ईरान — दोनों देशों के साथ "करीबी और मैत्रीपूर्ण" संबंध बनाए हुए है। भारत ने संकेत दिए हैं कि यदि शांति बहाल करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई प्रयास किए जाते हैं, तो वह इसमें अपना समर्थन देने को तैयार है।

MEA ने यह भी बताया कि भारत की ईरान और इज़राइल स्थित राजनयिक मिशन लगातार भारतीय नागरिकों के संपर्क में हैं और स्थानीय अधिकारियों द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जा रही है।

क्यों अहम है भारत का यह रुख?

भारत की ऊर्जा जरूरतों और खाड़ी देशों में बसे करोड़ों भारतीय नागरिकों को देखते हुए यह मुद्दा केवल भू-राजनीतिक नहीं बल्कि आर्थिक और मानवीय दृष्टिकोण से भी अहम है। भारत का यह संतुलित रुख न केवल उसकी कूटनीतिक सूझबूझ को दर्शाता है बल्कि यह भी बताता है कि वह किसी गुटबंदी की राजनीति में नहीं पड़ना चाहता।

जहां एक ओर पश्चिमी देश और कुछ क्षेत्रीय संगठन खुले तौर पर इज़राइल या ईरान के पक्ष में खड़े नज़र आ रहे हैं, वहीं भारत ने संयम और संवाद को प्राथमिकता देते हुए एक स्वतंत्र रेखा खींची है।


निष्कर्ष:

भारत ने एक बार फिर यह साबित किया है कि वह वैश्विक मंच पर किसी के दबाव में आकर नहीं बल्कि अपने राष्ट्रीय हित और वैश्विक शांति को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेता है। इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारत का यह तटस्थ और शांति-समर्थक रुख न केवल सराहनीय है, बल्कि भविष्य की कूटनीति के लिए भी एक उदाहरण है।

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