1.प्रोजेक्ट की तकनीकी और आर्थिक जटिलता
क्योंकि ये SU-57 एक फिफ्थ जनरेशन फाइटर है, लेकिन ये इस पर खुद रूस के भीतर भी आलोचना मिली है — खासकर इस्को इंजन, स्टील्थ फीचर और रडार सिग्नेचर को लेकर।
➡️भारत हो सकता है कोई जल्दबाजी में कोई निर्णय न लेते हुए, पूरी तकनीकी समीक्षा कर रहा हो।
➡️ जिसे आप अपना सबसे महंगा सौदा पा सकते हैं — जिसमें लॉन्ग टर्म सपोर्ट, इंडस्ट्रियल ट्रांसफर और इंडस्ट्रियल बिल्डिंग शामिल होगी।
🐉 2. क्या चीन का दबाव एक कारण हो सकता है?
यह सवाल वाजिब है।
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रूस और चीन के बीच मजबूत सैन्य और रणनीतिक संबंध हैं।
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यदि भारत SU-57 का पूरा सोर्स कोड ले लेता है, तो भारत की स्वतंत्र स्ट्राइक क्षमता काफी बढ़ सकती है — जो चीन को रणनीतिक तौर पर असहज कर सकता है।
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ऐसे में यह संभव है कि रूस भी दोनों देशों के संतुलन को ध्यान में रखकर कोई अंतिम समझौता करना चाहेगा।
हालांकि, भारत किसी तीसरे देश के दबाव में रक्षा नीति तय नहीं करता, लेकिन कूटनीतिक स्तर पर चीन का व्यवहार सरकार के आकलन को जरूर प्रभावित कर सकता है।
भारत को मिल सकती है SU-57 फाइटर जेट की पूरी सोर्स कोड एक्सेस, रूस ने दिया अभूतपूर्व प्रस्ताव
रूस की सरकारी रक्षा कंपनी यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन ने भारत को एक ऐतिहासिक प्रस्ताव दिया है। कंपनी ने घोषणा की है कि वह SU-57 फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट का 100 प्रतिशत सोर्स कोड भारत के रक्षा मंत्रालय को सौंपने के लिए तैयार है। इस फैसले के बाद, भारत को इस अत्याधुनिक लड़ाकू विमान पर पूर्ण नियंत्रण मिल जाएगा।
इसका अर्थ यह होगा कि भारत न केवल अपने हिसाब से SU-57 में स्थानीय हथियारों का एकीकरण कर सकेगा, बल्कि उसमें मनचाही तकनीकी और सामरिक बदलाव भी कर पाएगा। इतना ही नहीं, रूस ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि भारत चाहे, तो वह किसी तीसरे देश में निर्मित हथियारों को भी इस विमान में शामिल कर सकता है।
फ्रांस ने किया था इनकार, रूस ने दिखाया विश्वास
यह प्रस्ताव उस समय आया है जब फ्रांस ने भारत को राफेल फाइटर जेट का सोर्स कोड देने से इनकार कर दिया था। इसी वजह से भारत, राफेल में अपने स्वदेशी मिसाइल जैसे ब्रह्मोस को शामिल नहीं कर सका है। इस कारणवश ब्रह्मोस मिसाइल का एकीकरण रूसी मूल के Su-30MKI फाइटर जेट में किया गया है।
भारत चाहता है कि वह अपनी अत्याधुनिक स्वदेशी तकनीक को राफेल जैसे एडवांस्ड जेट्स में समाहित कर सके ताकि उसकी स्ट्राइक कैपेबिलिटी में भारी इजाफा हो। ऐसे में रूस की यह पेशकश भारत के लिए एक रणनीतिक अवसर साबित हो सकती है।
फिफ्थ जनरेशन फाइटर जेट्स में कोड है सबसे संवेदनशील हिस्सा
फिफ्थ जनरेशन फाइटर जेट्स में सॉफ्टवेयर सोर्स कोड को सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इसका कारण यह है कि इन विमानों की असली ताकत उनके सॉफ्टवेयर में निहित होती है। उदाहरण के तौर पर, अमेरिका के F-35 में एक करोड़ से ज्यादा लाइनें सिर्फ कोड की हैं। इसी तरह चीन के J-20 और FC-31 में भी अत्यंत जटिल कोडिंग मानी जाती है।
हालांकि SU-57 का कोड इन जेट्स की तुलना में कुछ सरल बताया जाता है, फिर भी यह पुराने अमेरिकी F-22 से कहीं अधिक जटिल है। ऐसे में रूस द्वारा इस स्तर की तकनीक भारत को सौंपने की पेशकश दुर्लभ और ऐतिहासिक मानी जा रही है।
भारत के लिए रणनीतिक मायनों में बड़ी उपलब्धि हो सकती है
यह प्रस्ताव यह भी दर्शाता है कि रूस भारत को एक विश्वसनीय रणनीतिक साझेदार मानता है। यदि भारत इस प्रस्ताव को स्वीकार करता है, तो न केवल वह SU-57 को अपने हिसाब से मॉडिफाई कर पाएगा, बल्कि भविष्य में छठी पीढ़ी के फाइटर जेट्स के विकास की राह भी सुगम हो सकती है।
हालांकि भारत सरकार की ओर से इस प्रस्ताव पर अब तक कोई औपचारिक निर्णय नहीं आया है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सौदा भारत की रक्षा स्वायत्तता को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है।

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